Sunday, September 27, 2020

अजंता गुफा

अंजता गुफा का परिचय
अजंता गुफा का मंदिर एक आश्चर्यजनक शानदार वास्तुशिल्प  कला है, जो भारत की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। जिसे विश्व विरासत स्थल(World Heritage Site) के रूप में स्वीकार किया गया है।अजंता गुफाएं विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

अजंता कि गुफाए कहा स्थित है 
अजंता की गुफाएं औरंगावाद(महाराष्ट्र) के पास स्थित है, यहाँ पर दुनिया के किसी भी कोनें से आसानी से पहुंचा जा सकता है। महाराष्ट्र में नियमित पर्यटन के माध्यम से बसों या टैक्सियों का उपयोग किया जाता है।
निकटतम हवाई अड्डा औरंगाबाद में स्थित है, जो मंदिरों से 99 किलोमीटर दूर स्थित है। इन गुफाओं की करिश्मा हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करती है

अजंता कि खोज 
अजंता गुफाए की खोज आर्मी के एक ऑफिसर जॉन स्मिथ और उनकी टीम ने वर्ष 1819 में की थी. जॉन स्मिथ शिकार करने जंगल आये थे तभी उन्हें एक ही क़तर में 29 गुफाओं की एक चैन दिखाई दी. तब से ये गुफाएं प्रसिद्ध हो गयी.

जिस तरह घोड़े की नाल होती है ये गुफाएं उसी आकर में बनी हैं. इन गुफाओं में 200 ईसा पूर्व से लेकर 650 ईसा पश्चात तक के बौद्ध धर्म की चित्रकारी देखने को मिलती है. अजंता की गुफा की देवरों पर अत्यंत सुन्दर राजकुमारियों और अप्सराओं के अलग-अलग मुद्राओं वाले चित्र बने हुए हैं.

गुफा का मंदिर घोड़े-जूता के आकार की खड़ी की चट्टान की तरह दिखाई देता है, जहां नीचे वाघुर नदी बह रही है। वाघुर नदी 200 फुट की ऊंचाई से गिरती है, जिसके परिणामस्वरूप झरने की एक श्रृंखला बनती है। इन बहते हुए झरने को चट्टानों में आसानी से देखा जा सकता है।

बौद्ध धर्म का चित्रण
अजंता गुफाओं में कटी हुई चट्टाने है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व और छठी शताब्दी  ईसा पूर्व के बीच इसकी उत्पत्ति का पता लगता हैं। अजंता की गुफाएं भगवान बुद्ध को समर्पित हैं। यह कम से कम संख्या में 30 है, ये गुफाएं अनुयायियों और बौद्ध धर्म के विद्यार्थियों के आवास के लिए निर्माण की गयी थीं।
अपने प्रवास के समय के दौरान, उन्होंने अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला कौशल और कलात्मक चित्रों के साथ गुफाओं को सुशोभित किया था। आम तौर पर, नक्काशी और चित्रकारी भगवान बुद्ध की जीवन कथाओं को दर्शाती हैं। 
सभी तीस गुफाओं को ‘चैत्री-गृह‘ (स्तूप हॉल) और ‘विहार‘ (आवास हॉल) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक गुफा मूल संरचना में संरक्षित हैं। गुफाएं 9, 10, 19, और 29 चैत्य गृह के नाम से जाना जाता है, इसमें भगवान की पूजा की जाती थी। शेष गुफाएं ‘संघहारस ‘ या ‘विहारस ‘ हैं जिनका उपयोग अनुयायियों के आवास उद्देश्यों और बौद्ध धर्म के विद्यार्थियों के लिए किया गया था।
गुफाओं को मुख्य प्रवेश द्वार से उनकी वर्तमान पहुंच के अनुसार गिने जाता है और उसी क्रम में इसे बनाया गया है। कलात्मक दृष्टिकोण से, गुफा 1, 2, 16 और 17 वास्तव में महत्वपूर्ण हैं और कला के उल्लेखनीय टुकड़े हैं जो निश्चित रूप से आधुनिक दुनिया की कला को हरा सकते हैं। इन गुफाओं की दीवारों को भित्ति चित्रों से सजाया गया है जो कि पिछले युग की एक ही आकर्षण और जीवंतता प्रदान करने के लिए बनाए जाते हैं।

दीवार पेंटिंग
अजन्ता में 'फ़्रेस्को' तथा 'टेम्पेरा' दोनों ही विधियों से चित्र बनाये गए हैं। चित्र बनाने से पूर्व दीवार को भली भांति रगड़कर साफ़ किया जाता था तथा फिर उसके ऊपर लेप चढ़ाया जाता था। अजन्ता की गुफा संख्या 16 में उत्कीर्ण ‘मरणासन्न राजकुमारी‘ का चित्र प्रशंसनीय है। वाकाटक वंश के वसुगुप्त शाखा के शासक हरिषेण (475-500ई.) के मंत्री वराहमंत्री ने गुफा संख्या 16 को बौद्ध संघ को दान में दिया था।

पुरातात्विक निष्कर्ष 
पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकट किए गए तथ्यों के अनुसार, गुफाओं को दो अलग-अलग क्षेत्रों में बनाया गया था, जिसमें कम से कम चार सदियों का अंतर था। पहले खंड में बने गुफाओं में , दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की तारीखें है, जबकि दूसरे खंड की वाकाटकों और गुप्त द्वारा बनाया गया था। प्रत्येक गुफा में बुद्ध के जीवन, बोधिसत्व और जातक की घटनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले नक्काशियों और चित्रकारी शामिल हैं।
अजंता की प्रसिद्ध गुफाओं के चित्रों की चमक हज़ार से अधिक वर्ष बीतने के बाद भी आधुनिक समय से विद्वानों के लिए आश्चर्य का विषय है। भगवान बुद्ध से संबंधित घटनाओं को इन चित्रों में अभिव्यक्त किया गया है। चावल के मांड, गोंद और अन्य कुछ पत्तियों तथा वस्तुओं का सम्मिश्रमण कर आविष्कृत किए गए रंगों से ये चित्र बनाए गए। लगभग हज़ार साल तक भूमि में दबे रहे और 1819 में पुन: उत्खनन कर इन्हें प्रकाश में लाया गया। हज़ार वर्ष बीतने पर भी इनका रंग हल्का नहीं हुआ, ख़राब नहीं हुआ, चमक पहले जैसे ही  बनी है । कहीं कुछ सुधारने या आधुनिक रंग लगाने का प्रयत्न हुआ तो वह असफल ही हुआ। रंगों और रेखाओं की यह तकनीक आज भी गौरवशाली अतीत का याद दिलाती है। 
वैसे ही साल 1983 में विश्व धरोहर द्वारा अजंता गुफाओं को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया|अजंता गुफाएं भारत की पहेली वास्तु है जो विश्व धरोहर की सूची में समाविष्ट हुई है|

अजंता कि गुफा का इतिहास 
अजंता की गुफाएं मुख्य रूप बौद्ध गुफा है, जिसमें बौद्ध धर्म की कला कृतियाँ है। इन गुफाओं का निर्माण दो चरणों में हुआ है। पहले चरण में सातवाहन और इसके बाद वाकाटक शासक वंश के राजाओं ने इसका निर्माण करवाया। पहले चरण की अजंता की गुफा का निर्माण दूसरी शताब्दी के समय हुआ था और दूसरे चरण वाली अजंता की गुफाओं का निर्माण 460-480 ईसवी में हुआ था। बता दें कि पहले चरण में  9, 10, 12, 13 और 15 ए की गुफाओं का निर्माण हुआ था। दूसरे चरण में 20 गुफा मंदिरों का निर्माण किया गया। पहले चo9रण को गलती हीनयान कहा गया था, इसका सम्बन्ध बौद्ध धाम के हीनयान मत से है। इस चरण की खुदाइयों में भगवान् बुद्ध को स्तूप से संबोधित किया गया है। दूसरे चरण की खुदाई लगभग 3 शताब्दी के बाद की गई। इस चरण को महायान चरण कहा गया। कई लोग इस चरण को वतायक चरण भी कहते हैं। जिसका नाम वत्सगुल्म के शासित वंश वाकाटक के नाम पर पड़ा है।

नैसर्गिक वारसा 
आप जब अजंता गुफा के तरफ कदम रखोंगे तब आप 29 बौद्ध गुफा मंदिर और भारत के कुछ सर्वश्रेष्ठ मूर्तियों को देखने को मिलेगा। गुफाएं पूर्व से पश्चिम की ओर क्रमबद्ध है। क्षेत्र के आसपास का प्राकृतिक सुंदरता और शांति ध्यान के लिए एक उत्तम जगह है।

गुफाए घुमने का समय 
दोस्तो अगर आप अंजता गुफाओं को जाने का सोच रहे हो तो आपको ये जानना जरूरी है, की अजंता गुफा जाने का सबसे अच्छा समय कौनसा है। तो आपको बता दे कि अजंता जाने के लिए सबसे अच्छा समय कौनसा है तो बता डे कि यह गुफाये पर्यटको के लिये पुरे साल खुली रहती है लेकिन महिने के हर सोमवार को यह बंद राहती है |

आप साल मे किसी भी मौसम मे आप इन गुफाओ को देखणे जा सकते हो |  लेकिन ऑक्टोंबर से फरवरी तक अच्छी जलवायू और थंडा मौसम होणे कि वजहसे यहा पर्यटको कि भीड ज्यादा होती है  अगर आप अजंता कि गुफाओ कि यात्रा पर जा रहे है तो आप यहा सुबह ९.०० से शाम ५.०० बजे तक घुम सकते है| लेकिन महिने के हर सोमवार को यह गुफाए बंद रहती है |



Sunday, June 28, 2020

भारत के विश्व धरोहर स्थल का परिचय


भारत के विश्व धरोहर स्थल 
चलो  आज हम जानते है विश्व के कुछ नायाब वास्तुशिल्प  के बारे में, ऐसे कुछ जानकारी जो बोहोत लोगो को पता नही है। विश्व में कुछ ऎतिहसिक साक्ष देते हुए कुछ वास्तु है जो कि बोहोत ही सुंदर है और हमें दंग कर देती है। जीने देख कर हमें ऐसा लगता है कि मानो ये सपने जैसा ही खूबसूरत है। विश्वभर में जितने भी  ऐतिहासिक वास्तु है उनके संरक्षण के लिए विश्व भर में एक संघटना काम करती है। जिसका कार्य यह है कि विश्व के सभी वास्तु जो ऐतिहासिक हो, उनका संरक्षण किया जाय।  उस संघटन का नाम है युनेस्को.


युनेस्को का परिचय
यूनेस्को (UNESCO) 'संयुक्त राष्ट्र , शैक्षणिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization)' का लघुरूप है।
संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) संयुक्त राष्ट्र का एक घटक निकाय है। इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष संस्था का गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित न्याय, कानून का राज, मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रता हेतु वैश्विक सहमति बने|
 यूनेस्को के 193 सदस्य देश हैं और 11 सहयोगी सदस्य देश और दो पर्यवेक्षक सदस्य देश हैं। इसके कुछ सदस्य स्वतंत्र देश भी नहीं हैं। इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है। इसके ज्यादार क्षेत्रीय कार्यालय क्लस्टर के रूप में है, जिसके अंतर्गत तीन-चार देश आते हैं, इसके अलावा इसके राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं। यूनेस्को के 27 क्लस्टर कार्यालय और 21 राष्ट्रीय कार्यालय हैं।
यूनेस्को मुख्यतः शिक्षा, प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक एवं मानव विज्ञान, संस्कृति एवं सूचना व संचार के जरिये अपनी गतिविधियां संचालित करता है। वह साक्षरता बढ़ानेवाले कार्यक्रमों को प्रायोजित करता है और वैश्विक धरोहर की इमारतों और पार्कों के संरक्षण में भी सहयोग करता है। यूनेस्को की विरासत सूची में हमारे देश के कई ऐतिहासिक इमारत और पार्क शामिल हैं। दुनिया भर के 332 अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठनों के साथ यूनेस्को के संबंध हैं। फिलहाल यूनेस्को के महानिदेशक आंद्रे एंजोले हैं। भारत 1946 से यूनेस्को का सदस्य देश है।

भारत के विश्व धरोहर स्थल का परिचय 

युनेस्को विश्व विरासत स्थल ऐसे खास स्थानों (जैसे वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं; और यही समिति इन स्थलों की देखरेख युनेस्को के तत्वाधान में करती है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुछ खास परिस्थितियों में ऐसे स्थलों को इस समिति द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाती है। अब तक (जून  2020 तक ) पूरी दुनिया में लगभग 1121 स्थलों को पुरातत्व विभाग द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जा चुका है जिसमें 869 सांस्कृतिक, 213 प्राकृतिक, 39 मिले-जुले।
अभी तक भारत में 38 विश्व विरासत स्थल है।


 क्र.धरोहर का नाम घोषित होने वाला वर्ष  राज्य
    
 1 अजंता गुफा  1983महाराष्ट्र ,औरंगाबाद 
 2 आगरा का किल्ला 1983 उत्तर प्रदेश ,आगरा
 3ताजमहल 1983 उत्तर प्रदेश ,आगरा
 4 एलोरा गुफाएं  1983 महाराष्ट्र
 5 कोणार्क सूर्य मंदिर 1984 उड़ीसा
 6 महाबलीपुरम के स्मारक के समूह  1984 तमिलनाडु
 7 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान 1985 राजस्थान
 8 काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान  1985 असम
 9 मानस राष्ट्रीय उद्यान  1985 असम
 10 गोवा के गिरजाघर एवं कॉन्वेंट 1985 गोवा
 11 हम्पी  1986 कर्नाटक
 12 फतेपुर सिखरी  1986 उत्तर प्रदेश
 13 खजुराहो के मंदिर 1986 मध्य प्रदेश
 14 सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान 1987 पश्चिम बंगाल
 15 एलिफेंटा के गुफाएं 1987 महाराष्ट्र
 16 पत्तदकल 1987 कर्नाटक
 17 महान चोल मंदिर  1987 तमिलनाडु 
 18 नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान एवं फूलों कि घाठी 1988,2005 उत्तराखंड
 19 सांची के बौद्ध स्तूप 1989 मध्य प्रदेश
 20 हुमायूं का मकबरा  1993 दिल्ली
 21 कुतुबमीनार एवं अन्य स्मारक  1993 दिल्ली
 22 भारतीय पर्वतीय रेल एवं दार्जिलिंग 1999 
 23 बौद्धगया का महाबोधि महाविहार 2002 बिहार
 24 भीमबेटका शैलाशय 2003 मध्य प्रदेश
 25 चांपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान 2004 गुजरात
 26 छत्रपति शिवाजी टर्मिनस 2004 महाराष्ट्र
 27 जंतर मंतर, जयपुर 2010 राजस्थान
 28 दिल्ली का लाल किल्ला  2007 दिल्ली
 29 पश्चिम घाट 2012 महाराष्ट्र,गोवा,कर्नाटक तमिलनाडु
 30 राजस्थान का पहाड़ी दुर्ग  2013 राजस्थान
 31ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान 2014 हिमाचल प्रदेश
 32 रानी की वाव  2014 गुजरात
 33 नालन्दा महाविहार/  नालंदा विश्वविद्यालय 2014 बिहार
 34 कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान  2016 सिक्किम
 35ली कोर्बूजिय के वास्तुशिल्प 2016 चंडीगढ़
 36 अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर  2017 गुजरात
 37 मुंबई का विक्टोरियन और आर्ट डेको एंसेंबंल 2018 मुंबई
 38 गुलाबी शहर 2019 जयपुर
    




 
ऊपर दिए हुए टेबल के अनुसार भारत में स्थित विश्व धरोहर के नामो का विवरण है। इस सभी स्थानों पर unesco द्वारा कुछ मदत किया जाता है। वैसे ही भारत में पुरातत्व विभाग द्वारा भी उनकी सरक्षण किया जाता है। इस स्थानों में जाने की लिए हर प्रकार कि सुविधाए अभी परिपूर्ण है।  unesco के स्थलों पर जाने के लिए कुछ फीस भी भरना पड़ता है।  आगे के ब्लॉग में हम इन सभी स्थलों के बारे में जानकारी पता करेंगे।

अजंता गुफा

अंजता गुफा का परिचय अजंता गुफा का मंदिर एक आश्चर्यजनक शानदार वास्तुशिल्प  कला है, जो भारत की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। जिसे व...